मुद्दे की बात : नामली हवालात में आत्म हत्या की घटना द्रवित करने वाली
उम्मीद है कि भविष्य में पुलिस महकमे के लोग और अधिक सावधानी बरतेंगे और इस कलंक से विभाग को बचाएंगे।
⚫ व्यवस्थाएं और सुधारनी ही होगी।
⚫ सेवानिवृत पुलिस अधीक्षक आरसी पंवार से वीरेंद्र त्रिवेदी की चर्चा
समाज में आत्महत्या के कारणो को खंगाल ती "आत्महत्या क्यों" विषय पुस्तक के लेखक, चिंतक सेवानिवृत पुलिस अधीक्षक आर.सी. पवांर हाल ही में रतलाम जिले के नामली थाने की हवालात में हुई आत्महत्या मामले से खास से आहत है। रतलाम जिले में पुलिस महकमे के विभिन्न बड़े पदों पर रहे पंवार समाज की एक आत्महत्या से भी खासे दुःखी होते हैं। वे कहते हैं कि ईश्वर ने जन्म जीने के लिए दिया है। समस्याओं से घबराकर मरने के लिए नहीं हवालात में हुई मौत को वे पुलिस और सभ्य समाज पर कलंक मानते हैं।

सेवानिवृत्त पुलिस अधीक्षक आरसी पंवार
इस घटना से द्रवित पंवार ने सैलाना के वरिष्ठ पत्रकार वीरेंद्र त्रिवेदी को नामली की घटना के मामले में चर्चा की।
हिरासत में मृत्यु हरेक के लिए कलंक
श्री पंवार कहते हैं कि पुलिस हिरासत में किसी की जान चले जाना, केवल पुलिस महकमे के लिए नहीं बल्कि सभ्य समाज और संपूर्ण शासन-प्रशासन के लिए कलंक है। नवीन कानून जो कि 1 जुलाई 2024 से लागू हुआ है, उसके अनुसार भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता धारा 56 में स्पष्ट उल्लेख है कि हिरासत में लेने वाले (पुलिस) का कर्तव्य है कि हिरासती-आरोपी की सुरक्षा एवं स्वास्थ्य का ध्यान जवाबदारी पूर्वक रखें। ऐसी चाक चौबंद व्यवस्था हो कि आत्महत्या के लिए आरोपी को कोई भी साधन नजर ही ना आए। हिरासत में लेने के पूर्व आरोपी की तलाशी धारा 49 के तहत ली जावे। ताकि उसके पास ऐसी वस्तु ना रहे जिससे वह स्वयं को या किसी अन्य को हानि पहुंचा सके। श्री पंवार बताते हैं की धारा 51,52,53 के तहत हिरासती/आरोपी का मेडिकल परीक्षण, उसकी गिरफ्तारी की सूचना परिजनों को देना, गिरफ्तारी का आधार बताना जरूरी है। ताकि आरोपी के जीवन के अधिकार सुरक्षित रहें। समय-समय पर केंद्र, राज्य शासन के निर्देश, सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश, मानवाधिकार आयोग आदि के दिशा निर्देशों के बावजूद नतीजा वही है "ढाक के तीन पात" ।

हिरासत में मृत्यु दर बढ़ी
श्री पंवार ने बताया कि विगत 6 वर्षों में 45.3% हिरासत में मृत्यु के प्रकरण बने। जिनमें फांसी लगाकर, जूते के लेस से, चादर के टुकड़े से, लोअर या साड़ी के फंदे से आत्महत्या के प्रकरण प्रकाश में अधिक आने लगे हैं। हवालात का शौचालय सुसाइड पॉइंट बनता जा रहा है। बैरक की खिड़की, गेट, पंखे के हुक से 27 प्रतिशत मामले प्रकाश में आए हैं। उपचार के दौरान 11% हृदया घात से आरोपियों के मरने के मामले भी प्रकाश में आए हैं। प्रदेश में 17 प्रतिशत हिरासत मृत्यु नरसिंहपुर में हुई है। जो इस मामले में प्रथम पायदान पर पाया गया है।
ईमानदारी बरती जाए
श्री पंवार बताते हैं कि इस समय ईमानदारी से कानून का पालन करने की जरूरत है। न्यायालय के दिशा निर्देशों का पालन करें।
शासन के निर्देशों को गंभीरता से लें सावधानी रखें तो हिरासत में मृत्यु को काफी सीमा तक नियंत्रित किया जा सकता है। और इस कलंक से पुलिस महकमा शासन और समाज कुछ हद तक बच सकता है। श्री पंवार ने कहा कि हिरासत में मृत्यु रोकने संबंधी कतिपय सावधानियां मेरी पूर्व प्रकाशित पुस्तक "न्याय कहां" के पृष्ठ क्रमांक 33 से 37 पर उल्लेखित है। उन्होंने उम्मीद जतलाई कि भविष्य में पुलिस महकमे के लोग और अधिक सावधानी बरतेंगे और इस कलंक से विभाग को बचाएंगे।
Hemant Bhatt