रतलाम में तत्कालीन कलेक्टर मिशा सिंह का मनमाना फैसला: निगम की जमीन पुलिस विभाग को बांटी
तत्कालीन कलेक्टर मिशा सिंह के इस फैसले से जहां रेडी-पटरी व्यापारियों के भविष्य पर अनिश्चितता के बादल छा गए थे, वहीं अब महापौर परिषद के सख्त रुख से साफ हो गया है कि निगम अपनी संपत्ति पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण या प्रशासनिक मनमानी बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है।
⚫ तुगलकी फरमान के खिलाफ अब नगर निगम ने खोला मोर्चा
⚫ एमआईसी ने लिया कोर्ट जाने का फैसला
⚫ नामांतरण और भवन अनुज्ञा पर रोक
हरमुद्दा
रतलाम, 6 अक्टूबर। रतलाम नगर निगम की स्वामित्व वाली हरमाला स्थित ऐतिहासिक सब्जी व फूल मंडी की भूमि को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। तत्कालीन कलेक्टर मिशा सिंह और जिला नजूल निर्वर्तन समिति द्वारा मनमाने तरीके से 25 मई 2026 को पारित एक आदेश के तहत, निगम की इस बहुमूल्य जमीन (सर्वे क्रमांक 514, रकबा 0.09 हेक्टेयर) को पुलिस अधीक्षक रतलाम को आवंटित कर दिया गया। तत्कालीन कलेक्टर के इस तुगलकी फरमान के खिलाफ अब नगर निगम ने मोर्चा खोल दिया है।

मंगलवार को महापौर प्रहलाद पटेल की अध्यक्षता में आयोजित 'महापौर परिषद' (MIC) की उच्चस्तरीय बैठक में इस प्रशासनिक मनमानी का पुरजोर विरोध करते हुए सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया गया कि कलेक्टर के इस आदेश के खिलाफ सक्षम न्यायालय में अपील वाद दायर किया जाएगा। आयोजित बैठक में महापौर पटेल के अलावा महापौर परिषद सदस्य, निगम आयुक्त, सहायक यंत्री, निगम सचिव आदि उपस्थित थे।
क्या है पूरा विवाद?
नगर निगम (नगर सुधार न्यास) की योजना क्रमांक 24 (हरमाला रोड) स्थित यह भूमि मूल रूप से निगम के आधिपत्य में है।
रेडी-पटरी व्यापारियों के लिए योजना
निगम द्वारा इस भूमि पर फल और सब्जी विक्रेताओं को सुव्यवस्थित व हाइजैनिक माहौल देने के लिए बाकायदा डीपीआर (DPR) तैयार कर ई-निविदाएं (E-Tenders) आमंत्रित की जा चुकी हैं। यहाँ प्लेटफॉर्म और शेड निर्माण का कार्य प्रस्तावित है।
2044 तक की लीज: जमीन पर काबिज आवंटित दुकानदारों की लीज अवधि निगम द्वारा पहले ही वर्ष 2044 तक बढ़ाई जा चुकी है। इसके बावजूद, तत्कालीन कलेक्टर मिशा सिंह ने मध्यप्रदेश नजूल भूमि निवर्तन निर्देश 2020 का हवाला देते हुए निगम के हितों को दरकिनार किया और 25 मई 2026 को भूमि गृह विभाग (पुलिस अधीक्षक) को आवंटित कर दी।
एमआईसी बैठक में लिए गए कड़े फैसले
⚫ अदालत का दरवाजा खटखटाएगा निगम: तत्कालीन कलेक्टर के आदेश के खिलाफ न्यायालय में विधिक अपील दायर की जाएगी।
⚫ कब्जा बरकरार रखने के निर्देश: नगर निगम आयुक्त को निर्देशित किया गया है कि उक्त भूमि पर निगम का भौतिक कब्जा हर हाल में बरकरार रखा जाए
⚫ नामांतरण और भवन अनुज्ञा पर रोक: इस जमीन पर किसी भी प्रकार का नामांतरण (Mutation) या पुलिस विभाग को भवन निर्माण की अनुमति (Building Permission) जारी नहीं की जाएगी।
⚫ एनओसी (NOC) व्यवस्था में बड़ा बदलाव: भविष्य में निगम सीमा क्षेत्र की किसी भी भूमि के आवंटन हेतु अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) देने से पहले महापौर/महापौर परिषद की स्वीकृति अनिवार्य कर दी गई है।
⚫ दिनों की समय-सीमा: आवंटन का कोई भी पत्र प्राप्त होते ही उसे 7 दिनों के भीतर महापौर परिषद के समक्ष प्रस्तुत करना होगा। यह देखा जाएगा कि क्या उस भूमि पर निगम की कोई विकास योजना प्रस्तावित है या नहीं, उसके बाद ही NOC पर निर्णय लिया जाएगा।
एमआईसी का सख्त रुख
तत्कालीन कलेक्टर मिशा सिंह के इस फैसले से जहां रेडी-पटरी व्यापारियों के भविष्य पर अनिश्चितता के बादल छा गए थे, वहीं अब महापौर परिषद के सख्त रुख से साफ हो गया है कि निगम अपनी संपत्ति पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण या प्रशासनिक मनमानी बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है।
Hemant Bhatt