साहित्य सरोकार : हर विधा की अपनी खूबसूरती और सौंदर्य

साहित्य सरोकार : हर विधा की अपनी खूबसूरती और सौंदर्य

प्रो. रतन चौहान ने कहा

⚫ जनवादी लेखक संघ का आयोजन

हरमुद्दा
रतलाम, 16 अगस्त। ग़ज़ल का दायरा बहुत विस्तृत है। सोलह सौ वर्षों पूर्व से लगाकर आज तक ग़ज़ल ने कई सोपान तय किए हैं । ग़ज़ल के प्रति लोगों का आकर्षण इस बात की गवाही देता है कि यह विधा काफी लोकप्रिय है। हर विधा की अपनी ख़ूबसूरती और सौंदर्य होता है। रचनाकार जिस भी विधा में अपनी बात कहे, उसका वैचारिक दृष्टिकोण स्पष्ट होना चाहिए । विषय के प्रति उसे सचेत रहना चाहिए और अपने पूर्ववर्ती रचनाकारों को पढ़कर अपनी एक अलग राह बनाने की कोशिश करना चाहिए । इससे वह विधा भी समृद्ध होगी और साहित्य भी समृद्ध होगा।

यह विचार जनवादी लेखक संघ उर्दू विंग द्वारा आयोजित तरही गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ कवि एवं अनुवादक प्रो. रतन चौहान ने व्यक्त किए । उन्होंने कहा कि मीर और ग़ालिब को पढ़े बग़ैर ग़ज़ल की राह पर क़दम नहीं रखा जा सकता । ये हमारी ग़जल के द्वार हैं । इससे गुज़र कर ही हम अपनी शैली को विकसित कर सकते हैं।

इस तरह के आयोजन होना सुखद

जनवादी लेखक संघ के अध्यक्ष युसूफ़ जावेदी ने कहा कि शहर में इस तरह का आयोजन होना बहुत सुखद है । यहां के रचनाकार, ख़ास तौर से ग़ज़ल कहने वाले , इतनी अधिक तादाद में है और अच्छी गजलें कह रहे हैं यह देखकर सुकून मिलता है । जनवादी लेखक संघ उर्दू विंग के प्रदेश संयोजक सिद्धीक़ रतलामी ने कहा कि ग़ज़ल के प्रति समर्पित भाव से यदि प्रयास किए जाएं तो हमारे बीच के रचनाकारों में से कई बेहतरीन ग़ज़लकार आगे आ सकते हैं । उन्होंने ग़ज़ल कहने का तरीका और ग़ज़ल कहने के लिए आवश्यक बिंदुओं पर भी प्रकाश डाला । उन्होंने कहा कि जनवादी लेखक संघ द्वारा यह आयोजन प्रारंभ ही इसलिए किया गया है ताकि ग़ज़ल कहने वाले रचनाकारों को एक प्लेटफार्म भी मिले और ग़ज़लों को सही तरीके से कहना भी यहां समझा जा सके।

एक मिसरे पर ग़ज़लें कही

गोष्ठी में तरही मिसरे ' फूलों की रहगुज़र पे चलो देखभाल के ' पर  युसूफ जावेदी, कैलाश व्यास, सिद्दीक़ रतलामी,प्रतिभा पांडे, आशा श्रीवास्तव , आशीष दशोत्तर, पूजा चोपड़ा, डॉ फ़रीद शेख, अमीरूद्दीन अमीर, शादाब रतलामी, पुष्पलता शर्मा, आशा उपाध्याय, विनोद झालानी, दिलीप जोशी, आई.एल.पुरोहित, लक्ष्मण पाठक, जी.एस.खींची, अशोक कुमार शर्मा, कीर्ति शर्मा, जितेन्द्र सिंह पथिक, हीरालाल खराड़ी, मुकेश सोनी, यू.सी.जायसवाल, कला डामोर सहित उपस्थित साहित्यकारों ने रचना पाठ किया।

अगला आयोजन 30 अगस्त को

जनवादी लेखक संघ के अध्यक्ष युसूफ़ जावेदी ने बताया कि जलेसं का अगला आयोजन 30 अगस्त रविवार को प्रातः 11 बजे भगत सिंह पुस्तकालय शहर सराय रतलाम पर होगा । यह आयोजन कहानी पर केंद्रित रहेगा । इस आयोजन में युवा कहानीकार आशीष दशोत्तर की बहुचर्चित कहानी 'झुरियां' का पाठ एवं उस पर बातचीत होगी। यह कहानी प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्रिका 'वागर्थ' में इस माह प्रकाशित हुई है। उन्होंने बताया कि तरही नशिस्त का अगला आयोजन 13 सितंबर को होगा । अगली नशिस्त में " फूलों से ज़ख़्म खाए हैं हमने बहार में " मिसरे पर रचनाकार अपनी ग़ज़लें पढ़ेंगे।