रतलाम कलेक्टर ने ब्लैकबोर्ड पर खुद संभाली 'चॉक', और डस्टर, बच्चों को सिखाए गणित के आसान सूत्र

कलेक्टर अजय कटेसरिया ने रावटी स्थित सांदीपनि विद्यालय का औचक निरीक्षण कर न सिर्फ व्यवस्थाओं का जायजा लिया, बल्कि एक शिक्षक की भूमिका में आकर बच्चों को ब्लैकबोर्ड पर गणित के सवाल भी हल कराए।

रतलाम कलेक्टर ने ब्लैकबोर्ड पर खुद संभाली 'चॉक', और डस्टर, बच्चों को सिखाए गणित के आसान सूत्र

जानी शिक्षा की जमीनी हकीकत

​सामाजिक सरोकार, क्यों महत्वपूर्ण है यह पहल?

दैनिक उपस्थिति पर कोई समझौता नहीं

हरमुद्दा
​रतलाम, 14 अगस्त। ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में सरकारी प्राथमिक शिक्षा की गुणवत्ता और बुनियादी गणितीय दक्षता (FLN) हमेशा से सामाजिक सरोकार और चिंता का विषय रही है। इसी व्यवस्था को मजबूत करने और बच्चों का हौसला बढ़ाने के लिए 'मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान' के तहत प्रशासनिक टीम खुद ज़मीन पर उतर रही है।


​रतलाम कलेक्टर अजय कटेसरिया ने रावटी स्थित सांदीपनि विद्यालय का औचक निरीक्षण कर न सिर्फ व्यवस्थाओं का जायजा लिया, बल्कि एक शिक्षक की भूमिका में आकर बच्चों को ब्लैकबोर्ड पर गणित के सवाल भी हल कराए। कलेक्टर के हाथ में चॉक और डस्टर थे।

​निरीक्षण के मुख्य बिंदु एवं प्रशासनिक पहल

⚫ ​कक्षा चौथी में गणितीय दक्षता की परख: कलेक्टर ने सीधे चौथी कक्षा के विद्यार्थियों के बीच पहुंचकर पाठ्यपुस्तकों और दैनिक पढ़ाई पर चर्चा की। उन्होंने ब्लैकबोर्ड पर भाग (डिवीजन) के प्रश्न लिखे और बच्चों को खुद हल करने के लिए प्रेरित किया।

⚫ ​कक्षा पांचवीं में सिखाए आसान तरीके: पांचवीं कक्षा के निरीक्षण के दौरान उन्होंने गणित के कठिन दिखने वाले सवालों को हल करने की सरल और सहज तकनीक समझाई। बच्चों में जिज्ञासा और नियमित अध्ययन की आदत विकसित करने पर बल दिया।

⚫ ​शिक्षकों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के निर्देश: विद्यालय स्टाफ से संवाद करते हुए कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि बुनियादी गणितीय समझ और दैनिक उपस्थिति पर कोई समझौता नहीं होगा।

​सामाजिक सरोकार: क्यों महत्वपूर्ण है यह पहल?

⚫ ​अधिकारियों की सीधी भागीदारी: जब जिले का शीर्ष प्रशासनिक अधिकारी खुद कक्षा में जाकर ब्लैकबोर्ड पर चौक उठाता है, तो इससे न केवल बच्चों का झिझक दूर होती है, बल्कि उनमें शिक्षा के प्रति नया उत्साह पैदा होता है।

⚫ ​बुनियादी शिक्षा पर ध्यान: अक्सर प्राथमिक कक्षाओं में बच्चे गणित और भाषा के मूल सिद्धांतों में पिछड़ जाते हैं। इस तरह के निरीक्षणों से शिक्षकों में भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षण के प्रति जवाबदेही तय होती है।

यह थे मौजूद

इस दौरान सीईओ जिला पंचायत सुश्री वैशाली जैन और सैलाना एसडीएम श्री जायसवाल सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

मुद्दे की बात

मुद्दे की बात तो यह है कि प्रशासन के इस रुख से स्पष्ट है कि अब केवल कागजी आंकड़ों के बजाय कक्षाओं में वास्तविक शैक्षणिक प्रगति को प्राथमिकता दी जा रही है।