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शख्सियत
शख्सियत : धारदार कविताएं क्यों नहीं लिखी जाती हैं अब?

शख्सियत : धारदार कविताएं क्यों नहीं लिखी जाती हैं अब?

आज की कविता सामाजिक सरोकारों के बजाये निजी भावनाओं का हिस्सा हो चुकी है, वह अमूर्त...