70 वर्षों की अविचल तपस्या: उम्र के 90वें पड़ाव पर भी कोर्ट में डटे एडवोकेट त्रिपाठी बने समाज और युवा पीढ़ी के लिए नजीर
⚫ प्रधान न्यायाधीश एवं अभिभाषकों ने किया सम्मान
हरमुद्दा
रतलाम, 9 अक्टूबर। भागदौड़ भरी इस जिंदगी में जहां लोग 60 की उम्र पार करते ही सेवानिवृत्ति और आराम की राह तलाशने लगते हैं, वहीं रतलाम के वरिष्ठ अभिभाषक एवं जिला अभिभाषक संघ के पूर्व अध्यक्ष बी.एल. त्रिपाठी सामाजिक दायित्व और न्याय सेवा का एक ऐसा अनुकरणीय उदाहरण पेश कर रहे हैं, जो दुर्लभ है। वर्ष 1957 में 'जूनी कोर्ट' से अपने न्यायिक सफर की शुरुआत करने वाले श्री त्रिपाठी आज सात दशकों (70 वर्षों) से निरंतर वकालत के पेशे में सक्रिय रहकर न्याय की मशाल जलाए हुए हैं।

शुक्रवार को उनके जन्मदिवस के अवसर पर जिला अभिभाषक संघ द्वारा उन्हें 11 किलो का हार पहनाकर और अभिनंदन पत्र भेंट कर सम्मानित किया गया। यह आयोजन केवल एक वकील के सम्मान का नहीं, बल्कि कर्तव्यनिष्ठा, कर्मयोग और सामाजिक सरोकार के उस जज्बे का सम्मान था जो आज के दौर में विरला ही देखने को मिलता है।
वरिष्ठों का अनुभव ही समाज की वास्तविक पूंजी

इस खास मौके पर प्रधान जिला न्यायाधीश नीना आशापुरे ने उनके दीर्घायु जीवन की कामना करते हुए कहा कि श्री त्रिपाठी का लंबा अनुभव न्याय प्रणाली ही नहीं, बल्कि संपूर्ण समाज के लिए मार्गदर्शक है।
बदलाव के प्रत्यक्षदर्शी रहे श्री त्रिपाठी
अभिभाषक संघ के अध्यक्ष राकेश शर्मा ने उनके लंबे और समर्पित कार्यकाल को अनुकरणीय बताया। पुराने न्यायिक भवन से लेकर आज के अत्याधुनिक न्यायालय भवन तक के बदलावों के प्रत्यक्षदर्शी रहे श्री त्रिपाठी का जीवन यह संदेश देता है कि जब इरादे मजबूत हों और कार्यप्रणाली में ईमानदारी हो, तो उम्र केवल एक संख्या बनकर रह जाती है।
आज के दौर में इस खबर का सामाजिक सरोकार
युवाओं के लिए प्रेरणा: आज जब युवा छोटी-छोटी असफलताओं से हताश हो जाते हैं, तब 70 सालों तक लगातार एक ही क्षेत्र में पूरी निष्ठा से सक्रिय रहने वाले श्री त्रिपाठी धैर्य और निरंतरता का पाठ पढ़ाते हैं।
वरिष्ठों के प्रति सम्मान की परंपरा: यह आयोजन समाज को यह सीख देता है कि बुजुर्गों और वरिष्ठों के ज्ञान व योगदान को समय रहते पहचानना और उनका आदर करना ही एक जागरूक समाज की पहचान है।
कर्म ही जीवन का मूल मंत्र: सेवानिवृत्ति की कोई सीमा नहीं होती; जब तक शरीर और मन साथ दे, तब तक समाज और न्याय के प्रति समर्पित रहना ही जीवन का वास्तविक अर्थ है।
यह रहे मौजूद

कार्यक्रम में विशेष न्यायाधीश आर.एस. चुंडावत, सी.जे.एम. सपना भारती कात्रोलिया, न्यायाधीश अनुपम तिवारी सहित चंद्रसिंह पवार, सुभाष उपाध्याय, पी.सी. मजावदिया जैसे शहर के अनेक गणमान्य एवं वरिष्ठ अधिवक्ता उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन राजीव ऊबी ने किया तथा आभार दिव्या शर्मा ने व्यक्त किया।
Hemant Bhatt