शख्सियत
शख्सियत : संस्कृत दुनिया की सबसे समृध्द भाषा लेकिन, उपेक्षा...
सम्राट अशोक के शासन काल में यह अस्तित्व में नहीं थी, उस समय ’ब्राम्ही लिपि’ चलती...
शख्सियत : मोबाइल टीवी की दुनिया ने आदमी को आदमी से कर दिया...
आप किसी भी घर में चले जाइए, आपको परिवार के सदस्यों को अपने-अपने मोबाइल पर झुका हुआ...
विचार सरोकार : मर चुकी है मानवता?
कोचिंग संस्थानों, शिक्षण संस्थानों में प्रतिवर्ष हजारों छात्र-छात्राएं आत्महत्या...
शख्सियत : अपना काम कुशलता से संपादित करना नहीं किसी कविता...
कविता लिखने को भले ही आसान मान लिया गया है, जबकि ऐसा है नहीं! कविता में मनुष्य समुदाय...
शख्सियत : एआई लाखों लोगों की रोजी रोटी छीन लेगा
एआई पर अत्यधिक निर्भरता के कारण इंसानों की सोचने समझने की शक्ति कम हो सकती है, जिससे...
शख्सियत : देश की मूलभूत समस्याओं से जनता को जागरूक बनाना...
आज मोबाइल कम्पनियों ने युवाओं को गुलाम बना दिया है। ठीक उसी तरह जैसे ब्रिटिश ईस्टइंडिया...
शख़्सियत : स्थानीय परिवेश में होती हैं श्रेष्ठ कविता की...
जीवन से जुड़ा कवि लोक भाषा चुनता है और लोक भाषा परिवर्तनशील होती है, इसलिए इसमें...
शख़्सियत : ख़तरों का सामना करती रही है अभिव्यक्ति की आज़ादी
आज हर वह रचनाकार, कलाकार जो सच को अपनी अन्तर्वस्तु बनाना चाहता है, उसे अनेक कठिनाइयों...
शख़्सियत : सोशल मीडिया के जरिए लुगदी साहित्य का हो रहा आदान-प्रदान
साहित्य पर बहुत बड़ी जिम्मेदारी है समय-समय पर समाज के कानों तक वह बात पहुंचाने की...
शख़्सियत : क़िताबों की दुनिया से अब बहुत दूर जा चुके लोग
डिजिटल युग में लोग किताबों से दूर होते जा रहे हैं। भारत में भी जिस दिन नेट नहीं...
शख्सियत : पीढ़ियों तक जीवित और जीवंत रहती हैं सार्थक कविताएं
असल कविता वह है जिसे कवि जब लिखे तो उसका खून झलके, नसों का कंपन सुनाई दे, कराह और...
शख्सियत : रचना, सृजन और संघर्ष से बनी शख्सियत
जीवन को देखने और रचने का उनका नजरिया कुछ अलग है। एक पत्रकारिता के शिक्षक के मन की...
शख्सियत : ’अब तक का इतिहास देश का झूठा बता बदलते जाओ’
नाज़िश का कहना था कि श्रेष्ठ कविता की एक पहचान यह है कि वह हमें एक से अधिक बार पढ़े...
शख्सियत : परिवेश से अछूता नहीं रह सकता लेखक का रचना संसार
कुल्लू हिमाचल प्रदेश में जन्मी मंजूषा जी राजनीति शास्त्र में एमए कर चुकी हैं। अनेक...